कर्ण-मंदिर 🕉️🙏🏻

किंबदंती अनुसार आज जहां ‘कर्ण-मंदिर’ है वह स्थान कभी जल के अंदर था और कर्णशिला नामक चट्टान की नोक ही जल के ऊपर उदित थी। कुरूक्षेत्र की युद्ध समाप्ति के बाद भगवान कृष्ण ने कर्ण का दाह संस्कार अपनी हथेली पर किया था जिसे उन्होंने संतुलन के लिये कर्णशिला की नोंक पर रखा था। एक अन्य कहावतानुसार कर्ण अपने पिता सूर्य की यहां आराधना किया करता था। यह भी कहा जाता है कि देवी गंगा और भगवान शिव व्यक्तिगत रूप से कर्ण के सम्मुख प्रकट हुए थे। यह मंदिर संगम के बायें किनारे अवस्थित है जो कर्ण के नाम पर ही है। पुराने मंदिर का हाल ही जीर्णोद्धार हुआ है तथा मानवाकृति से भी बड़े आकार की कर्ण एवं भगवान कृष्ण की प्रतिमाएं यहां स्थापिक है। परिसर में अन्य छोटे मंदिरों में भूमियाल देवता, राम, सीता एवं लक्ष्मण, भगवान शिव एवं पार्वती को समर्पित मंदिर शामिल हैं।