भीमताल

भीमताल एक त्रिभुजाकर झील है। यह उत्तराखंड में काठगोदाम से 22 किलोमीटर उत्तर की ओर है। इसकी लम्बाई 1674 मीटर, चौड़ाई 447 मीटर गहराई १५ से ५० मीटर तक है। नैनीताल से भी यह बड़ा ताल है। नैनीताल की तरह इसके भी दो कोने हैं जिन्हें तल्ली ताल और मल्ली ताल कहते हैं। यह भी दोनों कोनों सड़कों से जुड़ा हुआ है। नैनीताल से भीमताल की दूरी २२.५ कि. मी. है।भीमताल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सुन्दर घाटी में ओर खिले हुए अंचल में स्थित है। इस ताल के बीच में एक टापू है, नावों से टापू में पहुँचने का प्रबन्ध है। यह टापू पिकनिक स्थल के रूप में प्रयुक्त होता है। अधिकाँश सैलानी नैनीताल से प्रातछ भीमताल चले जाते हैं।

नैनीताल की खोज होने से पहले भीमताल को ही लोग महत्व देते थे। ‘भीमकार’ होने के कारण इस ताल को भीमताल कहते हैं। परन्तु कुछ विद्वान इस ताल का सम्बन्ध पाण्डु – पुत्र भीम से जोड़ते हैं। कहते हैं कि पाण्डु – पुत्र भीम ने भूमि को खोदकर यहाँ पर विशाल ताल की उत्पति की थी। यहाँ पर भीमेश्वर महादेव का मन्दिर है। यह प्राचीन शिव मन्दिर है माना जाता है कि जब वनवास के समय पांडवो में से भीम ने इस स्थान का दौरा किया था ।

वर्तमान मंदिर 17 वीं शताब्दी में, बज़ बहादुर (1638-78), चांद वंश के राजा और कुमाऊं के राजा द्वारा बनाया गया था। भीमताल एंग्लो-नेपाली युद्ध (1814-16) के बाद ब्रिटिश शासन के अधीन आया , जब नैनीताल को गर्मियों की राजधानी बना दिया गया था | नैनीताल के नजदीकी शहर से भीमताल सिर्फ 150-160 साल पुराना है । पुरानी पेडैसरियल रोड (Pedesterial road) अभी भी यहाँ उपयोग में है और यह सड़क काठगोदाम के पास सभी कुमाऊं क्षेत्र और यहां तक कि नेपाल और तिब्बत प्रांत को भी जोड़ती है |

इस ताल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सुंदर घाटी में और खिले हुए आँचल में स्थित है | इस ताल के बीच में टापू “भीमताल Fish Aquarium” के रूप में इस्तेमाल होता है | जिससे इस ताल की शोभा अत्यधिक बढ़ जाती है | नावो से टापू में पहुँचने का प्रबंध है | टापू में पहुँचते ही समुन्द्र एवम् झील की विभिन्न प्रजाति की मछलिया देख सकते है | भीमताल से 4 किलोमीटर की दूरी पर एक एक दूसरी झील नौकुचियाता भी है | और 8 किलोमीटर की दूरी पर सातताल है जिसकी रमणीयता देखते ही बनती है खुले आसमान और विस्तृत धरती का सही आनन्द लेने वाले पर्यटक अधिकतर भीमताल में ही रहना पसन्द कर रहे हैं।